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February 4, 2026 8:28 am

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परब यीशु मसीह की जन्म खुशी में प्रेम शांति एवं करुणा के भाव को जीवन में आत्मसात करने की जरूरत

रिपोर्टर,,,, कृष्ण नाथ टोप्पो,,,, बलरामपुर

राजपुर ,,,झींगो गिरजाघर चर्चा में क्रिसमस हर्षोल्लास बड़ी धूमधाम से मनाए गया और क्रिसमस के उल्लास में डूबी हुई 25 दिसंबर आधा रात में ठंड के मौसम में यीशु मसीह के जन्म गौहर घर चरनी जन्म होता है इस खुशी में

चरनी को सजाकर खुशी मनाते हैं

इन दिन ‘क्रिसमस’ के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भारत सहित दुनिया के कोने-कोने में इस दिन चर्चों की भव्य सजावट, रोशनी और प्रार्थनाओं का संगम देखते ही बनता है। ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए यह सबसे प्रमुख त्योहार है, जो शांति, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। यह पर्व ईसा मसीह (जीसस क्राइस्ट) के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन लोग न केवल एक-दूसरे को उपहार भेंट करते हैं, बल्कि प्रभु यीशु के बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लेते हैं।

01,क्षमादानः क्रिसमस का सबसे मूल्यवान उपहार

क्रिसमस के दिन उपहारों का आदान-प्रदान एक पुरानी परंपरा है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ‘क्षमा’ को सबसे बड़ा उपहार माना गया है। ईसा मसीह ने दुनिया को प्रेम, करुणा और दया का पाठ पढ़ाया। उनका संपूर्ण जीवन त्याग की एक अमर गाथा है। मान्यता है कि क्रिसमस के दिन लोग अपने मन के द्वेष को त्याग कर दूसरों को माफ करते हैं और स्वयं के लिए भी ईश्वर से क्षमा मांगते हैं। प्रभु यीशु ने सिखाया कि जो व्यक्ति दूसरों को क्षमा करने का साहस रखता है, वही वास्तव में ईश्वर की कृपा का पात्र बनता है।

02,,क्रूस पर दी गई क्षमा की अद्वितीय मिसाल

प्रभु यीशु के जीवन का सबसे हृदयस्पर्शी प्रसंग उनके अंतिम समय का है। जब उन्हें क्रूस पर लटकाया गया, तब भी उनके हृदय में अपने शत्रुओं के लिए घृणा नहीं, बल्कि दया थी। उन्होंने पीड़ा के उस क्षण में भी ईश्वर से प्रार्थना की, “हे पिता, इन्हें क्षमा करना क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।” उन्होंने उन लोगों के लिए भी क्षमा मांगी जिन्होंने उन पर असहनीय अत्याचार किए थे। यह संदेश आज भी प्रासंगिक है और हमें सिखाता है कि क्षमा की शक्ति प्रतिशोध से कहीं अधिक बड़ी और पवित्र है।

03 ,पापों का पश्चाताप और ईश्वर की शरण

कहा जाता है कि ईसा मसीह ने समस्त मानवजाति के पापों का बोझ अपने ऊपर ले लिया और उनके उद्धार के लिए स्वयं का बलिदान दिया। इसीलिए क्रिसमस के अवसर पर लोग चर्चों में जाकर अपने पापों को स्वीकार करते हैं (कन्फेशन) और सच्चे मन से पश्चाताप करते हैं। ईसाई धर्मग्रंथों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी गलतियों को ईमानदारी से स्वीकार करता है, तो उसे प्रभु की कृपा और आंतरिक शांति प्राप्त होती है। यह प्रक्रिया मनुष्य को आत्मिक रूप से शुद्ध करती है और उसे एक नई शुरुआत करने की प्रेरणा देती है।

04,,बाइबिल के अनुसार उद्धार और शांति का मार्ग

बाइबिल में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जो व्यक्ति प्रभु यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करता है और अपने अहंकार को त्याग कर पश्चाताप की राह चुनता है, ईश्वर उसके सभी अपराधों को क्षमा कर देते हैं। क्रिसमस का पर्व हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की करुणा असीम है। यह समय केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन करने और समाज में प्रेम व सेवा का प्रसार करने का है।

05,,,प्रेम और सेवा का संदेश

संक्षेप में, क्रिसमस का पर्व हमें ‘जीयो और जीने दो’ के साथ-साथ ‘क्षमा करो और आगे बढ़ों’ का संदेश देता है। साल 2025 का यह क्रिसमस हमें प्रभु यीशु के आदर्शों को जीवन में उतारने का अवसर प्रदान करता है। यदि हम अपने हृदय में दूसरों के प्रति दया और क्षमा का भाव रखते हैं, तो यही प्रभु के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा होगी। आइए, इस क्रिसमस पर हम भी अपने मन से कड़वाहट को निकालकर शांति और मानवता का दीप जलाएं।

झींगो ,,रेम फादर, अमृत कुजूर, सुपीरियर फादर, बरथो पल्ली पुरोहित फादर,कोरनेलियुस एक्का, सहायक पल्ली पुरोहित सिस्टर मरियम कुजूर, सुपीरियर सिस्टर, मोदेशता बेकसि सुसाना बड़ा उपस्थित

ATD News
Author: ATD News

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