अंबिकापुर. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सरगुजा जिला समिति ने छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक ईसाई परिवार को उनके मृत परिजन को दफनाने से रोकने की घटना की निंदा करते हुए राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में इस घटना को धार्मिक असहिष्णुता का उदाहरण बताते हुए प्रदेश के गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई है।
ज्ञापन के अनुसार, कांकेर जिले के अमाबेड़ा गांव में हाल ही में एक ईसाई परिवार के सदस्य चमरा राम की मौत के बाद उन्हें गांव के सामान्य श्मशान में दफनाने की अनुमति नहीं दी गई। परिवार ने अपनी निजी भूमि पर शव दफनाया, लेकिन कुछ स्थानीय लोगों की आपत्ति पर प्रशासन और पुलिस ने शव को खोदकर निकाल लिया और उसे अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। इस घटना से गांव में तनाव फैल गया, जिसमें दो चर्चों को आग लगाई गई और कई लोग घायल हुए। पुलिस ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश पर शव को निकाला और गांव से हटा दिया, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठे हैं।
समिति के सहायक सचिव के. शुक्ला द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि यह घटना देश की विविधता में एकता की भावना को चोट पहुंचाने वाली है। इसमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उनके सहयोगी संगठनों पर आरोप लगाया गया है कि वे धार्मिक विद्वेष फैला रहे हैं और संविधान की अवहेलना कर रहे हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि प्रभावित गांवों में तत्काल शांति समितियों का गठन किया जाए, कानून-व्यवस्था बहाल की जाए और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
सीपीआई(एम) ने चेतावनी दी है कि विष्णु देव साय सरकार के सत्ता में आने के बाद से प्रदेश में धार्मिक सहिष्णुता कम हो रही है। समिति ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है ताकि ऐसे कृत्यों पर रोक लग सके और देश की एकता बनी रहे।
यह घटना छत्तीसगढ़ में ईसाई समुदाय को दफनाने के अधिकार से वंचित करने की बढ़ती घटनाओं का हिस्सा है, जहां धर्मांतरण के आरोपों के बीच सामाजिक तनाव बढ़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।



