अंबिकापुर. सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम जुनवानी, नरकालो और नवापारा के किसान रबी फसल की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन जल संसाधन विभाग की उदासीनता ने उन्हें मजबूर कर दिया है कि वे खुद ही देसी जुगाड़ से सिंचाई की व्यवस्था करें। चार दशक पुरानी नहर के ध्वस्त हो जाने के बाद मरम्मत की मांग के बावजूद विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते किसानों ने चंदा इकट्ठा कर पाइप खरीदे और लकड़ी के बांस (बंबू) से अस्थायी संरचना बनाकर नहर का पानी खेतों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है।
खरीफ फसल की कटाई के बाद रबी फसल (जैसे गेहूं, चना आदि) के लिए सिंचाई जरूरी होती है। लेकिन नरकालो जलाशय से जुड़ी इस पुरानी नहर के टूटने से किसानों की खेती पर संकट मंडरा रहा था। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से बार-बार मरम्मत की गुहार लगाई, लेकिन पखवाड़े भर बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार, किसानों ने हार नहीं मानी और आपसी सहयोग से समस्या का समाधान निकाला।
किसानों ने मिलकर पाइप खरीदे और टूटी नहर के बीच में लकड़ी के बांस से जुगाड़ बनाया। आधा दर्जन से अधिक पाइपों को जोड़कर ऊपर से बिछाया गया, जिससे नहर नुमा संरचना तैयार हो गई। अब इसी देसी जुगाड़ से नहर का पानी खेतों में पहुंच रहा है और रबी फसल की सिंचाई हो रही है।
इस पहल में किसान रोहित दास, विकास राम, दलपति, राम प्रसाद, मोहित, नान राम, सरपंच नरकालो प्रेम सिंह, हरिस सोनी, विक्रम सिंह, तुलसी सहित कई अन्य ग्रामीणों का सक्रिय योगदान रहा। किसानों का कहना है कि विभाग की अनदेखी के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा, वरना फसल बर्बाद हो जाती।
यह घटना एक बार फिर विभागीय लापरवाही को उजागर करती है। सरगुजा जैसे क्षेत्र में जहां सिंचाई परियोजनाएं किसानों की जीवनरेखा हैं, वहां रखरखाव की कमी से ऐसी स्थितियां पैदा हो रही हैं। किसानों की यह पहलकदमी सराहनीय है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर विभाग कब जागेगा और पुरानी नहरों की मरम्मत करवाएगा..?



