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February 4, 2026 10:15 am

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विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र विवाद में सुनवाई की तारीख टलते ही, आदिवासी समाज का उग्र प्रदर्शन

बलरामपुर/सरगुजा. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे विवाद में गुरुवार (11 दिसंबर) को अहम सुनवाई हुई। जिला-स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं, लेकिन दस्तावेजों और साक्ष्यों को जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने के कारण सुनवाई की अगली तारीख 29 दिसंबर 2025 तय की गई। इस दौरान कलेक्टर कार्यालय में भारी सुरक्षा व्यवस्था थी, और सर्व आदिवासी समाज के कार्यकर्ताओं ने सुनवाई टलने पर उग्र प्रदर्शन किया, जिससे पुलिस के साथ झड़प की स्थिति बनी।

विवाद का बैकग्राउंड : फर्जी प्रमाण पत्र के आरोप और हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सर्व आदिवासी समाज ने आरोप लगाया कि विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने विधानसभा चुनाव में फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया। शिकायतकर्ता अधिवक्ता धन सिंह धुर्वे के अनुसार, प्रमाण पत्र विधायक के पति के नाम पर जारी किया गया, जबकि नियमों के मुताबिक यह उनके पिता के नाम पर होना चाहिए था। समाज का दावा है कि विधायक ने आदिवासी आरक्षण का गलत फायदा उठाकर चुनाव लड़ा।

इस मामले में हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए जिला कलेक्टर को जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया। समिति को पुराने रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों की गहन जांच करने को कहा गया। पिछली सुनवाई 27 नवंबर 2025 को हुई थी, जहां विधायक के वकील ने पक्ष रखा और सुनवाई टाली गई। विधायक को तीन नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुईं, हालांकि उनके वकील ने जवाब दिया। विधायक ने खुद मीडिया से बातचीत में सभी आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उनके प्रमाण पत्र दायरा पंजी क्रमांक 671/बी-121/2001-02 में दर्ज हैं, जो 11 जुलाई 2001 को जारी किए गए थे। उन्होंने एसडीएम वाड्रफनगर के दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि प्रमाण पत्र में पिता और पति दोनों के विकल्प दर्ज हैं, और सभी दस्तावेज विधिसम्मत हैं। विधायक ने कुछ लोगों पर जानबूझकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और जिला समिति से सूक्ष्म जांच की मांग की।

सर्व आदिवासी समाज ने इस मामले में वाड्रफनगर पुलिस चौकी में ज्ञापन सौंपकर विधायक, तत्कालीन एसडीएम और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। समाज के नेता और पूर्व कमिश्नर भानु प्रताप सिंह ने नेतृत्व किया, और कांग्रेस नेता शिवभजन सिंह मरावी ने कहा कि चुनाव नामांकन के दौरान आपत्ति दर्ज की गई थी, लेकिन राजनीतिक दबाव में कोई कार्रवाई नहीं हुई। समाज का कहना है कि अगर जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई गई, तो विधायक की सदस्यता रद्द हो सकती है।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ : दलीलें और फैसला

11 दिसंबर को बलरामपुर कलेक्टरेट में सुनवाई सुबह 11 बजे शुरू हुई। विधायक की ओर से वकील उदय प्रकाश सिन्हा ने दलील रखी और दस्तावेज पेश करने के लिए समय मांगा। उन्होंने समिति की क्षेत्राधिकार पर भी आपत्ति जताई। शिकायतकर्ता की ओर से वकील संतोष पांडे ने जवाब दिया और आरोपों को दोहराया। समिति ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई 29 दिसंबर को तय की, जहां आगे की दलीलें और अंतिम निर्णय की उम्मीद है।

सुरक्षा व्यवस्था : धारा 144 और पुलिस अलर्ट

किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए कलेक्टरेट के 500 मीटर दायरे में धारा 144 लागू की गई, जिसमें 4 या अधिक लोगों के एकत्र होने, रैली, जुलूस या हथियार ले जाने पर प्रतिबंध था। उल्लंघन पर धारा 188 के तहत कार्रवाई का प्रावधान था। पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा, और बड़ी संख्या में बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों को साप्ताहिक बाजार के पास और चांदो चौक पर रोका गया।

आदिवासी समाज का प्रदर्शन : बैरिकेड तोड़े, पुलिस से झड़प और NH जाम

सुनवाई के दौरान सर्व आदिवासी समाज के नेता, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग कलेक्टरेट पहुंचे, लेकिन उन्हें साप्ताहिक बाजार के पास रोक दिया गया। सुनवाई टलने की खबर सुनकर उन्होंने वहीं आम सभा आयोजित की और नारे लगाए। शाम करीब 4 बजे लोग उग्र हो गए, बैरिकेड तोड़कर कलेक्टरेट जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने चांदो चौक पर रोक लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच थोड़ी देर तक धक्का-मुक्की हुई। उसके बाद प्रदर्शनकारियों ने चांदो चौक पर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) जाम कर विरोध जताया। उनका कहना था कि विधायक को बार-बार अवसर दिया जा रहा है, जबकि अंतिम सुनवाई में फैसला होना चाहिए।

जिला प्रशासन की ओर से लिखित में अंतिम सुनवाई के दिन निर्णय देने की मांग पर सहमति जताने के बाद समाज के लोग वापस लौटे। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो चक्का जाम और बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।

यह मामला अब 29 दिसंबर को अंतिम चरण में पहुंच सकता है, जहां समिति की रिपोर्ट के आधार पर फैसला होगा। अगर आरोप सिद्ध हुए, तो विधायक की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। राजनीतिक हलकों में इस विवाद को भाजपा के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्र में। समाज के नेता भानु प्रताप सिंह ने कहा कि न्याय की उम्मीद है, वरना आंदोलन तेज होगा। विधायक पक्ष ने जांच पर भरोसा जताया है। मामले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

ATD News
Author: ATD News

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