अंबिकापुर. सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित बैक्साइट खदान और उससे जुड़े स्टील प्लांट के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मैनपाट के कमलेश्वरपुर में मां कुदरगढ़ी स्टील प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई के दूसरे दिन सैकड़ों ग्रामवासी और पर्यावरण प्रेमी एकजुट होकर पहुंचे। जनसुनवाई में कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई और लोगों ने एक स्वर में खदान को मैनपाट की हरियाली के लिए काल बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया।
विशेष पिछड़ी जनजाति की महिला नेत्री बनीं उम्मीद की किरण…
विशेष पिछड़ी जनजाति (मांझी समाज) से जिला पंचायत सदस्य रतनी मांझी इस आंदोलन की सबसे चमकती हुई सितारा बनकर उभरी हैं। वे लगातार मैनपाट की प्राकृतिक धरोहर, जल स्रोत, जंगल और जैव-विविधता को बचाने के लिए बक्साइड खदान का खुलकर विरोध कर रही हैं। रतनी मांझी ने कहा,
“मैनपाट हमारी मां है, हमारी संस्कृति है, हमारा जीवन है। कुछ मुट्ठी भर लोगों की लालच के लिए हम अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य नहीं बर्बाद होने देंगे।”
नामचीन भाजपा नेता पर सेटिंग के आरोप…
आंदोलनकारियों का आरोप है कि स्थानीय स्तर के कुछ नामचीन भाजपा नेता कंपनी के साथ मिलकर सेटिंग करने में लगे हैं। ग्रामीणों ने खुले मंच से इन नेताओं के नाम लेकर कहा कि जनता सब देख रही है और वक्त आने पर हिसाब होगा।
“मैं मैनपाट का हिडमा बनूंगा”
जनसुनवाई में सबसे चर्चित पल तब आया जब एक आक्रोशित युवक मंच पर पहुंचा और जोरदार आवाज में कहा,“बस्तर में हिडमा है, लेकिन अब मैनपाट का भी हिडमा पैदा हो जाएगा। अगर सरकार और कंपनी नहीं मानेगी तो हम हथियार उठाने को मजबूर हो जाएंगे। यह हमारी जमीन है, हमारी मैनपाट है, इसे कोई नहीं छीन सकता।”युवक की इस घोषणा पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। हालांकि प्रशासन और पुलिस मौके पर मौजूद रही।
कंपनी खामोश, ग्रामीणों ने की बहिष्कार की अपील
मां कुदरगढ़ी स्टील प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के प्रतिनिधि जनसुनवाई में मौजूद तो थे, लेकिन लोगों के भारी विरोध के आगे बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। ग्रामीणों ने कंपनी के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से साफ इंकार कर दिया और आगामी जनसुनवाइयों के बहिष्कार का ऐलान किया।
मैनपाट बचाओ अभियान को मिल रहा व्यापक समर्थन
मैनपाट बचाओ अभियान को अब पूरे सरगुजा सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों से समर्थन मिलने लगा है। पर्यावरणविद्, सामाजिक संगठन और आदिवासी संगठन एकजुट होकर इस खदान के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करने की तैयारी कर रहे हैं।



