अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित हसदेव अरण्य क्षेत्र के अति संवेदनशील केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को केंद्र सरकार ने आखिरकार पर्यावरण मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद अब इस ब्लॉक के लिए लगभग 1700 हेक्टेयर संरक्षित वन क्षेत्र में लाखों पेड़ों की कटाई होगी, जिसके बाद राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) को कोयला आवंटित किया जाएगा।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 24 नवंबर 2025 को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया। आदेश के अनुसार, केते एक्सटेंशन खदान के लिए पहले चरण में 16.748 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन स्वीकृत किया गया है। इस क्षेत्र में घने साल वनों सहित लाखों पेड़ काटे जाएंगे।
भूपेश बघेल का तीखा हमला…इस मंजूरी के तुरंत बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने पर्यावरण मंजूरी के आदेश की प्रति अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड करते हुए मौजूदा भाजपा सरकार पर करारा प्रहार किया है।
भूपेश बघेल ने लिखा…“जनता के भारी विरोध के बावजूद, आदिवासियों-वनवासियों के भारी विरोध के बावजूद, सैकड़ों ग्राम सभाओं के प्रस्ताव के बावजूद सरकार ने केते एक्सटेंशन के लिए वन एवं पर्यावरण की मंज़ूरी दे दी है। अब ऐतिहासिक महत्व वाली रामगढ़ की पहाड़ियों पर हमेशा ख़तरा मंडराता रहेगा।”
क्षेत्रवासियों में आक्रोश…हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति सहित दर्जनों ग्राम सभाओं ने पहले ही इस खदान का लगातार विरोध किया है। क्षेत्रवासी इसे जैव-विविधता के लिए घातक और आदिवासी संस्कृति-आस्था पर हमला बता रहे हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि केते एक्सटेंशन खदान खुलने से हाथी कॉरिडोर पर भी गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।
खदान का संचालन : अदाणी ग्रुप की कंपनी राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को कोयला सप्लाई के लिए
प्रभावित क्षेत्र : हसदेव अरण्य का कोर क्षेत्र, रामगढ़ (सीतारामगढ़) पहाड़ी के निकट पेड़ों की अनुमानित संख्या : लाखों (सटीक आंकड़ा अभी जारी नहीं)केते एक्सटेंशन के बाद अब हसदेव क्षेत्र में कुल तीन बड़ी कोल माइंस (पारसा ईस्ट-केते बेसन, PEKB एक्सटेंशन और केते एक्सटेंशन) को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे पूरे हसदेव अरण्य पर संकट गहरा गया है।



