अम्बिकापुर. सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के दूरस्थ आदिवासी गांव कदनई (सुगाझरिया) में एक बार फिर सड़क सुविधा के अभाव ने प्रशासन की पोल खोल दी है. नौ महीने की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों और ग्रामीणों को मजबूरन पारम्परिक झेलेगी (खटिया) में लादकर 2 से 3 किलोमीटर तक जंगल और पहाड़ी रास्तों से पैदल ढोना पड़ा.
सबसे दुखद बात यह रही कि महिला को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के क्रम में रास्ते में ही प्रसव हो गया और झेलेगी में ही बच्चे का जन्म हो गया.
ग्रामीणों के अनुसार, गांव से निकटतम पक्की सड़क तक कोई मोटरेबल रास्ता नहीं है. वर्षों से सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई. मजबूरी में पण्डो जनजाति के ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से महिला को झेलेगी में लिटाकर कठिन रास्तों से मुख्य मार्ग तक पहुंचाया.
महिला को जैसे-तैसे सड़क तक लाया गया, उसके बाद वहां से वाहन की मदद से बतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया. वहां मां और नवजात शिशु को प्राथमिक उपचार दिया गया. दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है.
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में यह रास्ता और भी दुर्गम हो जाता है. कई बार मरीजों को इसी तरह झेलेगी या दड़बा में ढोकर ले जाना पड़ता है. कई गर्भवती महिलाओं और मरीजों की जान तक जा चुकी है.
इस घटना के बाद एक बार फिर क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा गरमा गया है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण और 108 एंबुलेंस की पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है.



