सरगुजा. अंबिकापुर शहर में 22 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाई जा रही सड़कों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. निर्माण कार्य शुरू होने के महज दूसरे दिन ही कई जगहों पर सड़कें उखड़ गईं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी फैल गई है. लोग सड़क के टुकड़े हाथों से उखाड़कर घटिया सामग्री और खराब निर्माण का जीता-जागता सबूत पेश कर रहे हैं.
खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय के सामने बनाई जा रही सड़क की हालत सबसे खराब बताई जा रही है. वहां लोग पैदल चलते हुए ही डामर की परत को आसानी से उखाड़ फेंक रहे हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई सालों बाद शहर में इतने बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण हुआ है, लेकिन गुणवत्ता नाममात्र की भी नहीं है.
नाराज लोगों ने बताया कि निर्माण के दौरान नगर निगम के अधिकारी और ठेकेदार मौके पर मौजूद थे, फिर भी इस तरह की लापरवाही कैसे बरती गई..? एक स्थानीय युवक ने कहा, “हमने खुद देखा कि मशीन से डामर डाला जा रहा था, लेकिन उसमें बालू और मिट्टी की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि वह चिपक ही नहीं रही.”
गौरतलब है कि अंबिकापुर की महापौर डॉ. मंजूषा भगत ने सड़क निर्माण शुरू होने के समय लोगों से अपील की थी कि वे खुद निगरानी करें और अगर कोई घटिया काम दिखे तो तुरंत आवाज उठाएं. अब जब जनता सवाल उठा रही है, तो नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं. न तो कोई स्पष्टीकरण आया है और न ही ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई की बात हो रही है.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि 22 करोड़ रुपये की इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता का यह हाल है तो जनता का पैसा कहां जा रहा है..? क्या इस मामले में जवाबदेही तय होगी या फिर जांच के नाम पर इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा..?
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोग मांग कर रहे हैं कि तत्काल निर्माण कार्य रोका जाए, घटिया सामग्री की जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए. अब देखना यह है कि प्रशासन इस जनआक्रोश पर क्या कदम उठाता है.



