सरगुजा,छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड क्षेत्र में अमेरा खदान विस्तार और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है। ग्राम परसोडी कला के ग्रामीण पिछले 15 दिनों से तिरपाल और तंबू लगाकर खदान के खिलाफ धरने पर बैठे हैं और अपनी जमीन व फसलों की रक्षा के लिए रात-दिन रखवाली कर रहे हैं। ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए जान देने को भी तैयार हैं, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे।
ग्रामीणों का आरोप है कि अमेरा खदान के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा रात के अंधेरे में जेसीबी और हाइड्रा मशीनों के जरिए उनकी खड़ी धान की फसलों को नष्ट कर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि बिना उनकी सहमति के जबरन भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी खदान अधिकारियों ने बिना अनुमति के शासकीय मुंडा के मेड को तोड़कर जमीन पर कब्जा कर लिया था, जिससे किसानों को हजारों रुपये का नुकसान हुआ।
ग्रामीणों का धरना और प्रशासन की चुप्पी
परसोडी कला के ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर क्षेत्रीय विधायक, सरगुजा कलेक्टर और एसडीएम को आवेदन सौंपा था, लेकिन उनकी शिकायतों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन को और तेज करने का फैसला किया है। धरने में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन उनकी आजीविका का आधार है, और वे इसे किसी भी कीमत पर खोने को तैयार नहीं हैं।
पूर्व डिप्टी सीएम और सरपंचों का समर्थन
इस मामले में पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव और आसपास के पांच गांवों के सरपंचों ने परसोडी कला के ग्रामीणों का समर्थन किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समर्थन उनकी हिम्मत को और बढ़ा रहा है। हालांकि, खदान अधिकारियों द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने की बात सामने आ रही है, जिसके चलते ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
पहले भी हो चुका है नुकसान
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी अमेरा खदान के अधिकारियों ने रात के अंधेरे में उनकी फसलों को नष्ट कर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। ग्रामीणों के विरोध के बाद खदान के कर्मचारी मौके से भाग गए, लेकिन तब तक फसलों को भारी नुकसान हो चुका था। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मेहनत और आजीविका को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है।
आगे क्या..?
अमेरा खदान विस्तार और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर ग्रामीणों का विरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और खदान प्रबंधन ग्रामीणों की मांगों पर ध्यान देगा, या फिर यह संघर्ष और उग्र होगा? ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन और फसलों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
इस मामले में खदान प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। दूसरी ओर, ग्रामीणों की एकजुटता और समर्थन बढ़ने से यह मामला और तूल पकड़ सकता है। अब देखना यह है कि क्या ग्रामीण अपनी जमीन बचाने में सफल होंगे, या खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।



