रायपुर. छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं, और इसमें अंबिकापुर से भाजपा विधायक राजेश अग्रवाल का नाम मंत्री पद के लिए सबसे आगे चल रहा है. सूत्रों के अनुसार, 20 अगस्त तक होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में राजेश अग्रवाल के साथ दुर्ग से गजेंद्र यादव और आरंग से गुरु खुशवंत साहेब को भी मंत्री बनाया जा सकता है. मंत्रिमंडल में तीन नए चेहरों को शामिल करने की तैयारी है, जिसमें सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है.
राजेश अग्रवाल : एक मजबूत राजनीतिक सफर..राजेश अग्रवाल, जो हाल ही में अंबिकापुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए, ने अपने राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. मूल रूप से कांग्रेस के वफादार नेता रहे राजेश अग्रवाल ने लखनपुर और उदयपुर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी. हालांकि, 2017 में तत्कालीन डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव से नाराजगी के चलते उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया था.
राजेश अग्रवाल का राजनीतिक सफर 2009 के नगरीय निकाय चुनाव से चर्चा में आया, जब कांग्रेस से टिकट न मिलने पर उन्होंने बगावत कर लखनपुर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ा. वह महज एक वोट से हार गए थे. इसके बाद, 2014 में कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया और वह नगर पंचायत अध्यक्ष बने. 2017 में, टीएस सिंहदेव से मतभेद के बाद उन्होंने भाजपा ज्वाइन की और 2018 के विधानसभा चुनाव में अंबिकापुर सीट से दावेदारी की, लेकिन तब पार्टी ने अनुराग सिंहदेव को चुना.
2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राजेश अग्रवाल पर भरोसा जताया और उन्हें अंबिकापुर से टिकट दिया. इस हाई-प्रोफाइल सीट पर उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव को कड़े मुकाबले में 94 वोटों से हराकर सनसनी मचा दी. इस जीत ने उन्हें सरगुजा संभाग में एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया.
सामाजिक और व्यापारिक पृष्ठभूमि…राजेश अग्रवाल मारवाड़ी समाज से ताल्लुक रखते हैं और लखनपुर-उदयपुर क्षेत्र में उनकी गहरी पैठ है. उनके पिता चांदीराम अग्रवाल क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यापारी थे, जिनका कारोबार लखनपुर से लेकर उदयपुर तक फैला था. उस दौर में, जब आवागमन की सुविधाएं सीमित थीं, चांदीराम अग्रवाल की समाजसेवा और व्यापारिक नेटवर्क ने उन्हें क्षेत्र में लोकप्रिय बनाया था. राजेश अग्रवाल ने अपने पिता की इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाई. उनके भाई विजय अग्रवाल भी दो बार लखनपुर जनपद उपाध्यक्ष रह चुके हैं.
मंत्रिमंडल में दावेदारी के कारण…राजेश अग्रवाल का नाम मंत्रिमंडल विस्तार में इसलिए मजबूत माना जा रहा है, क्योंकि वह न केवल सरगुजा संभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि वैश्य समाज से आते हैं, जिसका वर्तमान में साय सरकार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. बृजमोहन अग्रवाल के सांसद बनने के बाद वैश्य समाज के प्रतिनिधित्व का अभाव था, जिसे राजेश अग्रवाल की नियुक्ति से पूरा किया जा सकता है. इसके अलावा, उनकी जीत ने सरगुजा की सियासत में भाजपा को नई ताकत दी है, खासकर टीएस सिंहदेव जैसे दिग्गज को हराने के बाद.
छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तब तेज हुई, जब बृजमोहन अग्रवाल के सांसद बनने के बाद एक मंत्री पद खाली हुआ. इसके अलावा, पहले से एक पद खाली था, और हरियाणा की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी 14 मंत्रियों की नियुक्ति की संभावना है. नियमों के अनुसार, 90 विधायकों वाली विधानसभा में 15% यानी 13.5 मंत्री हो सकते हैं, जिसे गोल करके 14 किया जा सकता है. वर्तमान में साय सरकार में 11 मंत्री हैं, और तीन नए चेहरों को शामिल करने की तैयारी है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में विधायकों के साथ वन-टू-वन मुलाकात की, जिसमें राजेश अग्रवाल, गजेंद्र यादव और गुरु खुशवंत साहेब शामिल थे.
सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों को औपचारिक रूप से बधाई भी दी गई है. शपथ ग्रहण समारोह 20 अगस्त को राजभवन में होने की संभावना है.
क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन…मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है. राजेश अग्रवाल के अलावा, गजेंद्र यादव (ओबीसी, दुर्ग) और गुरु खुशवंत साहेब (एससी/एसटी, आरंग) के नाम भी चर्चा में हैं. ये तीनों अलग-अलग सामाजिक समुदायों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे भाजपा की रणनीति को बल मिलेगा.
सियासी गलियारों में हलचल…राजेश अग्रवाल के मंत्री बनने की खबर ने सरगुजा संभाग में सियासी हलचल बढ़ा दी है. उनकी जीत और अब संभावित मंत्रिपद ने क्षेत्र में भाजपा की स्थिति को और मजबूत किया है. हालांकि, कुछ सियासी पंडितों का मानना है कि आखिरी समय में बदलाव संभव है, लेकिन फिलहाल राजेश अग्रवाल, गजेंद्र यादव और गुरु खुशवंत साहेब के नाम लगभग फाइनल माने जा रहे हैं.
छत्तीसगढ़ की जनता और सियासी हलकों में इस विस्तार को लेकर उत्सुकता चरम पर है. राजेश अग्रवाल जैसे जमीनी नेता के मंत्रिमंडल में शामिल होने से सरगुजा संभाग में विकास की नई उम्मीदें जगी हैं.



