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February 4, 2026 11:47 am

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हर मुराद होती है पुरी..400 से 500 साल पुरानी इस मजार पर हर जाति-धर्म के आते है लोग,उर्स की तैयारी शुरू

सरगुजा. अम्बिकापुर नगर के उत्तर-पूर्व की ओर तकिया गांव है और इसी गांव में बाबा मुरादशाह वली और बाबा मोहब्बतशाह वली के साथ एक छोटी मजार भी है. जिसे उनके तोते की मजार भी कहा जाता है. इस मजार पर दुआ मांगने के लिए सभी धर्म और सम्प्रदाय के लोग इकठ्ठा होते हैं.मजार पर चादर चढ़ाते हैं, लोग मन्नते मांगते हैं. बाबा मुरादशाह अपने मुरादशाह नाम के मुताबिक मुरादें भी पूरी करते हैं. मजार के पास ही देवी स्थान भी है, जो सांप्रदायिक सौहार्द का जीवंत उदहारण है. कहां जाता है बाबाओं के मजार शरीफ में  हर दुख तकलीफ का इलाज होता है. लगभग 400 से 500 साल पुरानी इस मजार पर हर जाति-धर्म के लोग आते हैं.अम्बिकापुर के तकिया मजार में आने वाले लोग बाबा से दुआ मांगने के साथ-साथ तोते की मजार पर भी चादर चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं.ऐसा माना जाता है कि यहां जो भी मन्नत मांगी जाती है वो कुबूल होती हैं. लोग मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से यहां दर्शन करने आते हैं.

पीर बाबाओं के कारनामे

दंतकथाओं में यह भी बताया जाता है कि
आज से सेकंडों साल पहले जब हजरत बाबा मुराद्शाह वली व मोहब्बत शाह वली अम्बिकापुर के तकिया ग्राम पहुंचे थे. उस दौरान वे एक गरीब कुम्हार के घर रुके थे उस दिन कुम्हार के घर चुल्हा नहीं जला था. लोगों के चेहरे पर एक डर था हजरत बाबा मुरादशाह वली ने जब कुम्हार से इसका कारण पूछा तो कुम्हार ने बताया कि बाकी पहाड़ी पर एक राक्षसी रहती है. जो हर दिन गांव के एक व्यक्ति की बलि लेती है, आज मेरे एकलोता पुत्र की बारी है. ये बात सुनते ही हजरत बाबा मुरादशाह वली ने कहा कि तुम चिंता मत करो, घर में चूल्हा जलाओ. खाना बनाओ और मुझे भी खिलाओ. आज मैं आपके बच्चे की जगह उस पहाड़ पर जाऊंगा. हजरत बाबा मुरादशाह वली ने कुम्हार के घर पर भोजन किया, और पहाड़ की तरफ चल पड़े. जैसे ही बाबा पहाड़ पर पहुंचे. राक्षसी हजरत बाबा मुराद्शाह वली को खाने का प्रयास करने लगी. तब बाबा ने अपने चिमटे से राक्षसी के नाक और कान को पकड़कर दबा दिया और उसकी नाक कट गई. राक्षसी द्वारा पानी मांगने पर बाबा मुरादशाह वली ने अपने चिमटे से पहाड़ खोदकर पानी निकाला. जिसे वर्तमान में बांक नदी के नाम से जाना जाता है. बाबा के चमत्कार से प्रभावित राक्षसी वहीं रहना चाहती थी. उसकी बात मानकर बाबा मुरादशाह ने उसे अपने साथ रख लिया. तभी से बाबा के मजार के पीछे मंदिर बनाया गया. जिसे नक्कटती देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है.

ATD News
Author: ATD News

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